Guar Mandi Bhav Today: कभी राजस्थान और हरियाणा के किसानों की पहचान मानी जाने वाली ग्वार फसल पिछले कई वर्षों से शांत बाजार का सामना कर रही थी। दाम स्थिर थे, मुनाफा सीमित था और कई किसानों ने दूसरी फसलों की ओर रुख कर लिया था। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। करीब 16 साल बाद ग्वार के भावों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है।
मंडियों में खरीद बढ़ी है, व्यापारियों की दिलचस्पी फिर जागी है और वायदा बाजार में भी मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। 20 फरवरी 2026 के आसपास ग्वार का औसत भाव कई क्षेत्रों में मजबूत स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में किसानों के मन में एक ही सवाल है-क्या यह तेजी लंबे समय तक टिकेगी या सिर्फ कुछ दिनों की कहानी है। आइए विस्तार से समझते हैं आज का ताजा मंडी भाव और बाजार का पूरा गणित।
आज का ताजा ग्वार मंडी भाव क्या है?
देश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में आज ग्वार के दाम पहले की तुलना में मजबूत बने हुए हैं। अलग-अलग राज्यों में क्वालिटी, नमी और आवक के आधार पर रेट में थोड़ा अंतर देखा जा रहा है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रमुख मंडियों के अनुमानित भाव (₹ प्रति क्विंटल)
| मंडी/क्षेत्र | न्यूनतम भाव | अधिकतम भाव | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| श्रीगंगानगर | ₹5,450 | ₹5,600 | ₹5,520 |
| हनुमानगढ़ | ₹5,400 | ₹5,550 | ₹5,480 |
| बीकानेर | ₹5,150 | ₹5,350 | ₹5,250 |
| नोहर | ₹5,300 | ₹5,450 | ₹5,380 |
| राजस्थान औसत | ₹4,700 | ₹5,300 | ₹5,145 |
| हरियाणा औसत | ₹6,800 | ₹7,100 | ₹7,000 |
वायदा बाजार में National Commodity and Derivatives Exchange (NCDEX) पर ग्वार सीड के दाम लगभग ₹5,300 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के दायरे में चल रहे हैं। वहीं ग्वार गम के भाव ₹10,400 से ₹10,800 प्रति क्विंटल के आसपास बने हुए हैं।
16 साल बाद ग्वार फिर क्यों बना चर्चा का केंद्र?
अगर पुराने किसान याद करें तो 2010–2012 का दौर ऐसा था जब ग्वार ने रिकॉर्ड भाव छुए थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्वार गम की मांग तेजी से बढ़ी थी और दामों में उछाल आया था। अब एक बार फिर कुछ वैसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस उद्योग में ग्वार गम की जरूरत बढ़ रही है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग और फार्मा सेक्टर में भी इसका इस्तेमाल होता है। निर्यात ऑर्डर में सुधार की खबरों ने घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल तैयार किया है। यही कारण है कि करीब डेढ़ दशक बाद ग्वार फिर से किसानों और व्यापारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
ग्वार में तेजी आने के पीछे मुख्य कारण
ग्वार के मौजूदा भाव सिर्फ संयोग नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कई अहम वजहें काम कर रही हैं।
- पहला कारण निर्यात मांग में सुधार है। विदेशों से ग्वार गम की डिमांड बढ़ने का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
- दूसरा कारण सीमित आवक है। कुछ इलाकों में इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहा, जिससे मंडियों में स्टॉक घटा है।
- तीसरा कारण व्यापारियों की सक्रिय खरीद है। भविष्य में और तेजी की संभावना को देखते हुए बड़े व्यापारी स्टॉक तैयार कर रहे हैं।
- चौथा कारण बाजार की धारणा है। जब बाजार में सकारात्मक खबरें आती हैं तो खरीदारी का माहौल बनता है और कीमतें ऊपर की ओर बढ़ने लगती हैं।
क्या ग्वार फिर पुराने रिकॉर्ड छू सकता है?
कई किसान यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ग्वार फिर से ₹20,000 या ₹30,000 प्रति क्विंटल जैसे स्तर देख सकता है। फिलहाल मौजूदा हालात को देखते हुए इतनी बड़ी छलांग तुरंत संभव नहीं लगती। हालांकि यदि वैश्विक मांग में बड़ा उछाल आता है और सप्लाई सीमित रहती है तो लंबे समय में ऊंचे स्तर देखने को मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वार का बाजार ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसलिए किसानों को भावनाओं में बहकर निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रखनी चाहिए।
किसानों के लिए क्या रणनीति सही रहेगी?
मौजूदा समय में किसानों के पास अच्छी क्वालिटी का ग्वार है तो उन्हें एक साथ पूरा माल बेचने के बजाय चरणबद्ध बिक्री पर विचार करना चाहिए। इससे वे औसत बेहतर बना सकते हैं। साथ ही मंडी रुझान, वायदा बाजार की चाल और निर्यात से जुड़ी खबरों पर नियमित नजर रखना जरूरी है।
अगर तेजी बरकरार रहती है तो आने वाले हफ्तों में और सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर अचानक आवक बढ़ती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी आती है तो भाव दबाव में भी आ सकते हैं।
आगे का संभावित रुख
आने वाले दिनों में ग्वार बाजार कई फैक्टर पर निर्भर करेगा-निर्यात ऑर्डर, घरेलू स्टॉक की स्थिति, नई फसल के अनुमान और वैश्विक कमोडिटी ट्रेंड। फिलहाल इतना साफ है कि 16 साल बाद ग्वार ने फिर से बाजार में हलचल मचा दी है। किसान और व्यापारी दोनों सतर्क हैं और हर अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।
अगर यही रफ्तार बनी रही तो ग्वार एक बार फिर किसानों के लिए आकर्षक फसल बन सकता है।